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2026 में IVF इलाज के माध्यम से माता-पिता बने कपल द्वारा नवजात शिशु के नन्हे पैरों को प्यार से थामे हुए हाथ
2026 में IVF इलाज के बाद माता-पिता बने कपल की गोद में नई ज़िंदगी की पहली झलक

2026 में IVF इलाज आज उन लाखों कपल्स के लिए उम्मीद की सबसे मजबूत किरण बन चुका है जो लंबे समय से पैरेंट बनने का सपना देख रहे हैं। बदलती लाइफस्टाइल, देर से शादी, हार्मोन से जुड़ी दिक्कतें और स्ट्रेस जैसे कारणों ने भारत में फर्टिलिटी से जुड़ी समस्याओं को तेजी से बढ़ाया है। ऐसे समय में सही जानकारी, सही समय पर की गई जांच और भरोसेमंद इलाज आपकी प्रेग्नेंसी जर्नी को आसान और सुरक्षित बना सकता है। यही वजह है कि प्रेग्नेंसी प्लानिंग 2026 अब सिर्फ उम्र के हिसाब से नहीं बल्कि मेडिकल तैयारी, सही डॉक्टर और सही ट्रीटमेंट सिलेक्शन के साथ की जा रही है।

आज की बेस्ट IVF ट्रीटमेंट गाइड यही कहती है कि 2026 में IVF इलाज सिर्फ एक मेडिकल प्रोसेस नहीं बल्कि एक पूरा केयर सिस्टम बन चुका है जिसमें कपल की बॉडी, माइंड और इमोशनल हेल्थ तीनों का ध्यान रखा जाता है। लेटेस्ट टेक्नोलॉजी, बेहतर एम्ब्रियो कल्चर सिस्टम और पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान की वजह से IVF के रिजल्ट पहले से ज्यादा भरोसेमंद हो गए हैं। इस गाइड में आप जानेंगे कि सही जांच कब करानी है, कौन सा ट्रीटमेंट आपके लिए सही रहेगा और कैसे आप अपने पेरेंट बनने के सपने को सुरक्षित और समझदारी से पूरा कर सकते हैं।

2026 में IVF इलाज क्यों जरूरी हो रहा है – बदलती प्रेग्नेंसी प्लानिंग

2026 में IVF(In-vitro Fertilization) इलाज आज सिर्फ एक विकल्प नहीं बल्कि कई कपल्स के लिए एक जरूरी मेडिकल सपोर्ट बन चुका है। बदलती लाइफस्टाइल, देर से शादी, काम का दबाव और हार्मोन से जुड़ी दिक्कतों की वजह से नेचुरल कंसीव करने में मुश्किलें बढ़ रही हैं। ऐसे समय में प्रेग्नेंसी प्लानिंग 2026 का मतलब सिर्फ सही उम्र पर कोशिश करना नहीं रह गया है बल्कि सही जांच, सही डॉक्टर और सही ट्रीटमेंट के साथ आगे बढ़ना बन गया है। इसी वजह से IVF इलाज को पहले से ज्यादा भरोसेमंद और प्लान्ड तरीके से अपनाया जा रहा है। आज भारत में IVF सक्सेस रेट भी पहले के मुकाबले बेहतर हुआ है, जिससे कपल्स का भरोसा और मजबूत हो रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बताया है कि प्रजनन आयु के लगभग हर 6 में से 1 व्यक्ति अपने जीवन में कभी न कभी बांझपन की चुनौती से गुजरता है, जिससे IVF जैसे इलाज की जरूरत लगातार बढ़ रही है।

IVF इलाज और फर्टिलिटी समस्याओं के बढ़ते कारण

आज के समय में बहुत से कपल्स को यह समझ ही नहीं आता कि प्रेग्नेंसी में देरी क्यों हो रही है। बढ़ता वजन, अनियमित पीरियड्स, थायरॉइड और पीसीओएस जैसी दिक्कतें शरीर की नैचुरल फर्टिलिटी को धीरे धीरे कमजोर कर देती हैं। कई बार इंफेक्शन, पहले हुए मिसकैरेज या हार्मोनल इम्बैलेंस भी बड़ी वजह बनते हैं। ऐसे में 2026 में IVF इलाज उन कपल्स के लिए उम्मीद की नई राह बनकर सामने आता है जो समय पर सही इलाज चाहते हैं। इलाज शुरू करने से पहले IVF से पहले जांच बहुत जरूरी होती है ताकि असली कारण साफ समझ में आ सके और ट्रीटमेंट सही दिशा में आगे बढ़े।

• वजन और लाइफस्टाइल का फर्टिलिटी पर असर
• हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी दिक्कतें
• इंफेक्शन और रिप्रोडक्टिव हेल्थ की समस्याएं
• सही समय पर की गई IVF से पहले जांच का महत्व

प्रेग्नेंसी प्लानिंग 2026 में IVF इलाज की भूमिका

आज की प्लानिंग पहले से कहीं ज्यादा मेडिकल बेस्ड और जागरूक हो चुकी है। अब कपल्स सिर्फ कोशिश नहीं करते बल्कि पहले अपनी बॉडी को समझते हैं, जरूरी जांच करवाते हैं और फिर सही ट्रीटमेंट चुनते हैं। ऐसे में IVF एक प्लान्ड और सेफ ऑप्शन बन गया है जो सही समय पर सही स्टेप लेने में मदद करता है। इससे अनावश्यक देरी, बार बार फेल होने का डर और इमोशनल स्ट्रेस काफी हद तक कम हो जाता है।

• बॉडी रेडीनेस के हिसाब से ट्रीटमेंट प्लान
• समय पर कंसीव करने की बेहतर संभावना
• इमोशनल और फिजिकल स्ट्रेस में कमी
• सही मेडिकल गाइडेंस के साथ आगे बढ़ना

भारत में IVF इलाज को लेकर बदलती सोच

कुछ साल पहले तक IVF को लेकर लोगों में झिझक और डर ज्यादा था। अब लोग खुलकर बात कर रहे हैं, सही जानकारी ले रहे हैं और ट्रीटमेंट को एक नॉर्मल मेडिकल प्रोसेस की तरह देखने लगे हैं। सोशल अवेयरनेस, बेहतर क्लीनिक नेटवर्क और ट्रांसपेरेंट काउंसलिंग ने इस सोच को बदलने में बड़ी भूमिका निभाई है। आज भारत में IVF सक्सेस रेट भी बेहतर हुआ है, जिससे लोगों का भरोसा और मजबूत हुआ है और सही बेस्ट IVF ट्रीटमेंट गाइड के जरिए कपल्स अपने फैसले ज्यादा समझदारी से ले पा रहे हैं।

• सोशल अवेयरनेस का बढ़ता असर
• क्लीनिक और डॉक्टर की बेहतर पहुंच
• सही जानकारी से बढ़ता भरोसा
• ट्रांसपेरेंट ट्रीटमेंट प्रोसेस

2026 में IVF इलाज से पहले जरूरी मेडिकल तैयार

2026 में IVF इलाज शुरू करने से पहले शरीर की सही तैयारी बहुत जरूरी हो गई है क्योंकि अब इलाज को सिर्फ एक मेडिकल प्रोसेस नहीं बल्कि पूरे बॉडी सिस्टम की तैयारी माना जाता है। सही समय पर की गई IVF से पहले जांच डॉक्टर को यह समझने में मदद करती है कि बॉडी अंदर से कितनी रेडी है और कौन सा ट्रीटमेंट प्लान सबसे सुरक्षित रहेगा। आज की बेस्ट IVF ट्रीटमेंट गाइड भी यही कहती है कि बिना तैयारी के ट्रीटमेंट शुरू करने से सक्सेस पर असर पड़ सकता है, इसलिए IVF इलाज से पहले सही मेडिकल चेकअप को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

IVF से पहले जांच और 2026 में IVF इलाज की नई गाइडलाइंस

आज के समय में IVF से पहले जांच सिर्फ एक फॉर्मेलिटी नहीं रही बल्कि यह पूरे ट्रीटमेंट की नींव बन चुकी है। सही रिपोर्ट्स के बिना इलाज शुरू करना अब रिस्की माना जाता है। नई गाइडलाइंस के अनुसार डॉक्टर पहले बॉडी की ओवरऑल हेल्थ, हार्मोन बैलेंस और रिप्रोडक्टिव सिस्टम की स्थिति को अच्छे से समझते हैं और फिर ट्रीटमेंट प्लान बनाते हैं। इससे न सिर्फ सक्सेस के चांस बढ़ते हैं बल्कि अनावश्यक दवाओं और इमोशनल स्ट्रेस से भी बचाव होता है।

• हार्मोन प्रोफाइल की जांच
• ब्लड शुगर और थायरॉइड टेस्ट
• यूटेरस और ओवरी की बेसिक रिपोर्ट
• पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान की तैयारी

हार्मोन, अल्ट्रासाउंड और IVF से पहले जांच की पूरी प्रक्रिया

हर कपल की बॉडी अलग होती है, इसलिए IVF से पहले जांच भी एक तय पैटर्न में नहीं बल्कि बॉडी की जरूरत के हिसाब से की जाती है। इसमें हार्मोन लेवल चेक करना, ओवरी की रिजर्व कैपेसिटी समझना और यूटेरस की कंडीशन देखना शामिल होता है। अल्ट्रासाउंड से अंदर की संरचना साफ दिखती है और हार्मोन रिपोर्ट से ओवुलेशन पैटर्न का अंदाजा मिलता है। सही IVF से पहले जांच से डॉक्टर को यह तय करने में आसानी होती है कि कौन सा प्रोटोकॉल आपके लिए ज्यादा सुरक्षित और असरदार रहेगा।

• AMH और FSH टेस्ट
• पेल्विक अल्ट्रासाउंड
• ओवुलेशन ट्रैकिंग
• यूटेरस लाइनिंग की जांच

IVF इलाज के लिए बॉडी प्रिपरेशन

ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले बॉडी को अंदर से मजबूत करना बहुत जरूरी होता है। सही डाइट, नींद और लाइफस्टाइल सुधारने से दवाओं का असर बेहतर होता है। प्रेग्नेंसी प्लानिंग 2026 में यह माना जाता है कि जब बॉडी पहले से हेल्दी होती है तब 2026 में IVF इलाज के रिजल्ट ज्यादा पॉजिटिव आते हैं। छोटी छोटी आदतों में बदलाव आपकी पूरी जर्नी को आसान बना सकते हैं।

• संतुलित और पोषक डाइट
• रेगुलर हल्की एक्सरसाइज
• स्मोकिंग और अल्कोहल से दूरी
• स्ट्रेस कम करने की आदत

भारत में 2026 में IVF इलाज की पूरी स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

ट्रीटमेंट की शुरुआत ओवरी को एक्टिव करने से होती है ताकि एक से ज्यादा हेल्दी एग्स तैयार हो सकें। डॉक्टर खास दवाओं के जरिए ओवरी को स्टिमुलेट करते हैं और अल्ट्रासाउंड से उनकी ग्रोथ को मॉनिटर करते हैं। यह पूरा स्टेप बहुत ध्यान से किया जाता है क्योंकि यहीं से पूरे ट्रीटमेंट की दिशा तय होती है। सही टाइमिंग और सही डोज का चुनाव बेस्ट IVF ट्रीटमेंट गाइड के अनुसार किया जाता है ताकि 2026 में IVF इलाज के लिए बॉडी सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ सके।

• ओवरी की ग्रोथ की रेगुलर मॉनिटरिंग
• हार्मोन लेवल की जांच
• दवाओं की सही डोज का चयन
• एग मैच्योरिटी पर फोकस

एग रिट्रीवल और एम्ब्रियो ट्रांसफर प्रक्रिया

जब एग्स पूरी तरह तैयार हो जाते हैं तब उन्हें एक छोटी सी मेडिकल प्रोसेस के जरिए निकाला जाता है जिसे एग रिट्रीवल कहा जाता है। इसके बाद लैब में एग और स्पर्म को मिलाकर एम्ब्रियो बनाया जाता है और सबसे हेल्दी एम्ब्रियो को यूटेरस में ट्रांसफर किया जाता है। इस स्टेज पर 2026 में IVF इलाज का असली उद्देश्य पूरा होता है क्योंकि यहीं से IVF के बाद प्रेग्नेंसी की शुरुआत की संभावना बनती है।

• सेफ और शॉर्ट मेडिकल प्रोसेस
• लैब में एम्ब्रियो डेवलपमेंट
• सबसे हेल्दी एम्ब्रियो का चयन
• यूटेरस में ट्रांसफर की तैयारी

IVF के बाद प्रेग्नेंसी की मेडिकल मॉनिटरिंग

एम्ब्रियो ट्रांसफर के बाद शुरुआती हफ्ते बहुत संवेदनशील होते हैं और इस दौरान IVF के बाद प्रेग्नेंसी की सही मॉनिटरिंग बहुत जरूरी मानी जाती है। डॉक्टर ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड के जरिए यह देखते हैं कि एम्ब्रियो सही जगह पर इम्प्लांट हुआ है या नहीं। सही समय पर की गई जांच से किसी भी रिस्क को जल्दी पहचाना जा सकता है और आगे की केयर को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है।

• ब्लड टेस्ट से प्रेग्नेंसी कंफर्मेशन
• अल्ट्रासाउंड से इम्प्लांटेशन चेक
• दवाओं और सपोर्ट थेरेपी की निगरानी
• फॉलोअप विजिट का सही शेड्यूल

2026 में IVF इलाज की सक्सेस रेट – भारत में IVF सक्सेस रेट की सच्चाई

2026 में IVF इलाज को लेकर लोगों की सबसे बड़ी जिज्ञासा यही होती है कि आखिर इसके रिजल्ट कितने भरोसेमंद हैं। आज के समय में ट्रीटमेंट पहले से ज्यादा एडवांस हो चुका है और सही प्लानिंग के साथ किए गए केस में पॉजिटिव रिजल्ट की संभावना बढ़ी है। सही समय पर जांच, बॉडी की तैयारी और सही डॉक्टर के चुनाव से भारत में IVF सक्सेस रेट में भी लगातार सुधार देखने को मिल रहा है। अब लोग सिर्फ आंकड़ों पर नहीं बल्कि अपनी मेडिकल कंडीशन के हिसाब से रिजल्ट को समझने लगे हैं, जिससे भारत में IVF सक्सेस रेट को लेकर ज्यादा क्लैरिटी बन पाई है।

उम्र के अनुसार भारत में IVF सक्सेस रेट

IVF के रिजल्ट पर उम्र का असर बहुत गहरा होता है। कम उम्र में एग और स्पर्म की क्वालिटी बेहतर होती है, जिससे प्रेग्नेंसी के चांस भी ज्यादा रहते हैं। जैसे जैसे उम्र बढ़ती है, बॉडी की नेचुरल फर्टिलिटी कम होती जाती है और इसके साथ ही भारत में IVF सक्सेस रेट भी धीरे धीरे घट सकता है। इसलिए डॉक्टर अक्सर सलाह देते हैं कि समय पर इलाज शुरू करना बेहतर रहता है ताकि रिजल्ट के चांस ज्यादा रहें।

• 30 साल से कम उम्र में बेहतर रिजल्ट की संभावना
• 30 से 35 के बीच स्टेबल रिजल्ट
• 35 के बाद ज्यादा मॉनिटरिंग की जरूरत
• उम्र के अनुसार ट्रीटमेंट प्लान का महत्व

2026 में IVF इलाज की नई टेक्नोलॉजी और रिजल्ट

मेडिकल फील्ड में आ रही नई टेक्नोलॉजी ने IVF के रिजल्ट को पहले से ज्यादा भरोसेमंद बना दिया है। बेहतर एम्ब्रियो कल्चर सिस्टम, एडवांस लैब सेटअप और जेनेटिक टेस्टिंग जैसी सुविधाओं ने 2026 में IVF इलाज को ज्यादा सटीक और सुरक्षित बना दिया है। इन सुधारों की वजह से भारत में IVF सक्सेस रेट में भी पॉजिटिव बदलाव देखने को मिल रहा है और फेल केस की संख्या में कमी आ रही है।

• एडवांस एम्ब्रियो कल्चर सिस्टम
• जेनेटिक स्क्रीनिंग की सुविधा
• बेहतर लैब मॉनिटरिंग
• पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल

फेल IVF केस में सक्सेस बढ़ाने के उपाय

कई बार पहली बार में रिजल्ट नहीं मिल पाता और यह कपल्स के लिए इमोशनली बहुत मुश्किल होता है। ऐसे में सही दिशा में अगला कदम उठाना बहुत जरूरी होता है। बेस्ट IVF ट्रीटमेंट गाइड यह सलाह देती है कि हर फेल साइकल के बाद बॉडी और रिपोर्ट्स का डीटेल्ड रिव्यू होना चाहिए ताकि अगला ट्रीटमेंट पहले से ज्यादा स्ट्रॉन्ग और पर्सनलाइज्ड बनाया जा सके।

• फेल साइकल के कारणों की पहचान
• बॉडी और हार्मोन रिपोर्ट का रिव्यू
• डाइट और लाइफस्टाइल में सुधार
• पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान

2026 में IVF इलाज की लागत – भारत में खर्च और प्लानिंग

हर कपल यह जानना चाहता है कि ट्रीटमेंट पर कितना बजट लगेगा और किस तरह की प्लानिंग सही रहेगी। सही जानकारी के साथ आगे बढ़ना बहुत जरूरी होता है क्योंकि 2026 में IVF इलाज अब पहले से ज्यादा पर्सनलाइज्ड हो चुका है और उसी के साथ इसकी लागत भी केस के अनुसार बदल सकती है। आज की बेस्ट IVF ट्रीटमेंट गाइड यही सलाह देती है कि खर्च को समझते हुए ट्रीटमेंट चुनने से फाइनेंशियल स्ट्रेस कम होता है और भारत में IVF सक्सेस रेट को बेहतर बनाए रखने में भी मदद मिलती है।

IVF इलाज का औसत खर्च

भारत में IVF की लागत शहर, क्लीनिक और मेडिकल जरूरत के हिसाब से अलग अलग हो सकती है। किसी कपल के लिए एक साइकल में कम खर्च आता है तो किसी के लिए ज्यादा। सही जानकारी लेने से आप अपने बजट के अनुसार सही सेंटर और ट्रीटमेंट चुन सकते हैं। 2026 में IVF इलाज के केस में खर्च को समझते हुए कदम उठाना बहुत जरूरी होता है और बेस्ट IVF ट्रीटमेंट गाइड भी यही कहती है कि सिर्फ कीमत नहीं बल्कि ट्रीटमेंट क्वालिटी पर ध्यान देना चाहिए।

• शहर और क्लीनिक के अनुसार खर्च में अंतर
• दवाओं और लैब प्रोसेस का असर
• एक्स्ट्रा प्रोसीजर से बढ़ता बजट
• सही पैकेज का चुनाव

सरकारी और प्राइवेट IVF सेंटर में अंतर

सरकारी और प्राइवेट सेंटर के ट्रीटमेंट प्रोसेस में कुछ बेसिक फर्क होता है। सरकारी सेंटर में खर्च कम हो सकता है लेकिन वेटिंग और फैसिलिटी लिमिटेड हो सकती है। वहीं प्राइवेट सेंटर में ज्यादा ऑप्शन और कस्टमाइज्ड केयर मिलती है। ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले IVF से पहले जांच दोनों ही तरह के सेंटर में जरूरी मानी जाती है ताकि बॉडी की स्थिति साफ समझ में आ सके और 2026 में IVF इलाज सही दिशा में आगे बढ़ सके।

• सरकारी सेंटर में कम लागत
• प्राइवेट सेंटर में पर्सनलाइज्ड केयर
• फैसिलिटी और टाइमलाइन में फर्क
• सही रिपोर्ट्स के आधार पर ट्रीटमेंट प्लान

IVF ट्रीटमेंट में फाइनेंशियल प्लानिंग

ट्रीटमेंट शुरू करने से पहले अपने फाइनेंशियल प्लान को समझना बहुत जरूरी होता है। प्रेग्नेंसी प्लानिंग 2026 में अब लोग सिर्फ मेडिकल नहीं बल्कि बजट प्लानिंग को भी उतना ही महत्व देते हैं। सही सेविंग, इंश्योरेंस कवर और पैकेज की जानकारी लेकर आगे बढ़ने से ट्रीटमेंट का सफर ज्यादा आसान बन सकता है।

• खर्च का पहले से अनुमान लगाना
• इंश्योरेंस ऑप्शन की जांच
• किस्त में भुगतान की सुविधा
• इमरजेंसी बजट की तैयारी

2026 में IVF इलाज के बाद की लाइफ – IVF के बाद प्रेग्नेंसी की देखभाल

IVF इलाज पूरा होने के बाद असली जिम्मेदारी की शुरुआत होती है क्योंकि अब बॉडी को पूरी तरह सपोर्ट और केयर की जरूरत होती है। IVF के बाद प्रेग्नेंसी के शुरुआती हफ्ते बहुत संवेदनशील होते हैं और इस दौरान सही रूटीन, सही दवाएं और इमोशनल सपोर्ट बहुत मायने रखते हैं। 2026 में IVF इलाज के बाद दी गई सही देखभाल से प्रेग्नेंसी को सेफ और स्टेबल बनाए रखने में मदद मिलती है।

IVF के बाद प्रेग्नेंसी में डाइट और लाइफस्टाइल

डाइट और लाइफस्टाइल का सीधा असर प्रेग्नेंसी के रिजल्ट पर पड़ता है। IVF के बाद प्रेग्नेंसी के दौरान बॉडी को ज्यादा पोषण और आराम की जरूरत होती है ताकि एम्ब्रियो सही तरीके से डेवलप हो सके।

• प्रोटीन और आयरन से भरपूर डाइट
• ज्यादा पानी पीने की आदत
• हल्की फिजिकल एक्टिविटी
• स्ट्रेस कम करने की कोशिश

बेड रेस्ट, मेडिसिन और मेडिकल चेकअप

डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं और सही बेड रेस्ट इस समय बहुत जरूरी होता है। सही टाइम पर दवाएं लेना और रेगुलर चेकअप से 2026 में IVF इलाज के बाद प्रेग्नेंसी को सुरक्षित रखा जा सकता है और IVF के बाद प्रेग्नेंसी के रिस्क को भी कम किया जा सकता है।

• दवाओं का सही टाइम
• रेगुलर ब्लड टेस्ट
• अल्ट्रासाउंड मॉनिटरिंग
• डॉक्टर के फॉलोअप विजिट

IVF इलाज के बाद इमोशनल सपोर्ट

इस जर्नी में इमोशनल सपोर्ट उतना ही जरूरी होता है जितना मेडिकल केयर। पॉजिटिव माहौल, परिवार का साथ और सही काउंसलिंग 2026 में IVF इलाज के बाद कपल को मानसिक रूप से मजबूत बनाती है।

• परिवार और पार्टनर का साथ
• स्ट्रेस मैनेजमेंट की आदत
• जरूरत पर काउंसलर से बात
• पॉजिटिव सोच बनाए रखना

निष्कर्ष

2026 में IVF इलाज आज उन कपल्स के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद रास्ता बन चुका है जो लंबे समय से पैरेंट बनने की कोशिश कर रहे हैं। सही जानकारी, समय पर की गई जांच और पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान के साथ IVF अब पहले से ज्यादा सुरक्षित और असरदार हो गया है। बदलती लाइफस्टाइल और बढ़ती फर्टिलिटी समस्याओं के बीच यह जरूरी हो गया है कि कपल्स अपनी बॉडी को समझें, सही सेंटर चुनें और बिना देरी के सही इलाज की शुरुआत करें।

इलाज सिर्फ एक मेडिकल प्रोसेस नहीं बल्कि एक पूरी केयर जर्नी है जिसमें फिजिकल, इमोशनल और मेंटल हेल्थ तीनों का ध्यान रखा जाता है। जब आप सही गाइडेंस, सही जांच और सही सपोर्ट के साथ आगे बढ़ते हैं, तो पेरेंट बनने का सपना न सिर्फ पूरा होता है बल्कि यह सफर ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद भी बन जाता है।

Frequently Asked Questions
IVF से पहले कौन-कौन सी जांच कराना जरूरी होता है?
IVF से पहले हार्मोन प्रोफाइल, थायरॉइड, ब्लड शुगर, AMH टेस्ट, पेल्विक अल्ट्रासाउंड, स्पर्म एनालिसिस और कुछ इंफेक्शन से जुड़ी जांच कराई जाती हैं ताकि बॉडी की तैयारी और ट्रीटमेंट की दिशा सही तय की जा सके।
भारत में IVF सक्सेस रेट किन बातों पर निर्भर करता है?
भारत में IVF सक्सेस रेट उम्र, एग और स्पर्म की क्वालिटी, बॉडी की ओवरऑल हेल्थ, सही ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल और सेंटर की लैब टेक्नोलॉजी पर निर्भर करता है। कम उम्र और सही तैयारी के साथ सक्सेस के चांस ज्यादा होते हैं।
IVF इलाज के बाद प्रेग्नेंसी में क्या खास सावधानियां रखनी चाहिए?
IVF के बाद प्रेग्नेंसी में डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं समय पर लेना, सही डाइट रखना, ज्यादा आराम करना, स्ट्रेस से बचना और रेगुलर चेकअप कराना बहुत जरूरी होता है ताकि प्रेग्नेंसी सुरक्षित बनी रहे।
IVF इलाज शुरू करने का सही समय क्या माना जाता है?
अगर 12 महीनों तक नेचुरल कोशिश के बाद भी प्रेग्नेंसी नहीं होती या उम्र 35 साल से ज्यादा है, तो बिना देरी किए IVF जैसे ट्रीटमेंट पर विचार करना सही माना जाता है।
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Dr. Renu Lamba

Fertility & IVF Specialist | Founder – Gulmohar IVF, Panchkula

  • 10+ years of expertise in IVF, IUI, ICSI & fertility care
  • Specialized in PCOS, recurrent IVF failure & donor programs
  • Trained in advanced reproductive techniques & ultrasound
  • Known for ethical, transparent & patient-centered approach
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